इन मासूम सी आँखों में कुछ ख्वाब दो
बढ़ते हुए बच्चों के हाथों में किताब दो

उन ख़्वाबों में चलो कुछ रंग भर दें
सूखने से पहले उन पौधों में आब दो

बंजर हो जायेंगे वो सुनहरे खेत चलो
इस जमीन को झेलम और चिनाब दो

टूटते तारों में छुपा है एक नया सूरज
चलो अँधेरे जहां को एक आफताब दो

चेहरे के नूर से चमकती हैं आँखे मेरी
गेसुओं से अपने चेहरे को हिजाब दो

जरा नकाब हटाओ रुखसार से अपने
जहाँ को एक और तुम माहताब दो

मेरी आँखों में अभी भी दम है बाकी
मेरे प्याले में साकी थोड़ी शराब दो

जिससे मिलो ‘चन्दन’ प्यार से मिलो
दुनिया को मुहब्बत तुम बेहिसाब दो

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