ये मेरे दीवानेपन का सुरूर है, बात कोई जरूर है
नज़र तेरी जो दिखे मुझे तो लगे समंदर-ए-नूर है .

मयखाने का रुख किया शराब के लिए
साकी, निगाह-ए-यार ने पीना भुला दिया

 

डूबना ही मुकद्दर है तो समंदर की सी गहारियों में डूबेंगे
वरना उथले पानी में डूब कर मरना तो कोई बात नहीं